कोरोना के गंभीर मरीजों पर “डेक्सामेथासोन” के इस्तेमाल को मंजूरी

Health

नई द‍िल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संक्रमण के हल्के गंभीर से लेकर अधिक गंभीर मामलों में मिथाइलप्रेडीनिसोलोन के विकल्प के रूप में Dexamethasone के इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी है।

कोरोना संक्रमण के उपचार के क्लीनिकल प्रबंधन प्रोटोकॉल को अद्यतन करते हुए डेक्सामेथैसन के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है। यह परिवर्तन विशेषज्ञों की रायशुमारी और उपचार में इसके लाभ के पयार्प्त सबूत मिलने पर किया गया है। इससे पहले 13 जून को प्रोटोकॉल अद्यतन हुआ था।

डेक्सामेथैसन एक ‘स्टेरायड’ है और इसका इस्तेमाल रोगप्रतिरोध तथा सूजन से संबंधित समस्याओं में किया जाता है। रिकवरी क्लीनिकल ट्रायल में कोविड-19 के भतीर् मरीजों को यह दवा दी गयी। इस ट्रायल में यह पाया गया कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इससे लाभ पहुंचता है तथा वेंटिलटर पर के मरीजों की मृत्युदर एक तिहाई और ऑक्सीजन थेरेपी के मरीजों की मृत्युदर करीब 2० प्रतिशत घट गयी। यह दवा जरूरी दवाओं की राष्ट्रीय सूची(एनएलईएम) का हिस्सा है और आसानी से उपलब्ध है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अद्तन प्रोटोकॉल की जानकारी दे दी है ताकि इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी की जा सके और कोरोना संक्रमितों पर आधिकारिक रूप से इसका इस्तेमाल हो सके।

सरकार ने डेक्सामेथासोन दवा को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है। इस दवा का इस्तेमाल सूजन को कम करने के लिए किया जाता है। जिन मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत होगी, उन्हें यह दवा दी जाएगी। डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल मेथाइलप्रेडनिसलोन के विकल्प के तौर पर किया जाएगा। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने डेक्सामेथासोन के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए कहा है। कुछ दिन पहले ब्रिटिश क्लीनिकल ट्रायल में पाया गया था कि इस दवा में कोरोना के मरीजों की जान बचाने की क्षमता है।

उधर, दिल्ली में शनिवार को कोरोना के खिलाफ सेरोलॉजिकल सर्वे शुरू किया गया। इसके तहत, 20 हजार सैंपल लिए जाएंगे। सेरोलॉजिकल एक एंटीबॉडी टेस्ट है। इससे यह पता चलता है कि वायरस कितना फैला हुआ है। इसके तहत उन लोगों का सैंपल इकट्ठे किए जाएंगे, जो पहले से कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं या जो बिना लक्षण वाले मरीज हैं।\


– एजेंसी

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