लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने को अखाड़ा परिषद का समर्थन

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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनाने को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान का साधु-संतों की संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने समर्थन किया है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि अब समय आ गया है कि लव जिहादियों ‘राम नाम सत्य’ हो जाना चाहिए और उन्हें ऐसा दंड मिलना चाहिए कि उनकी आने वाली पीढ़ियां भी उसे याद रखें।

महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि लव जिहाद के विषय को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि यह अपराध की श्रेणी में आता है। संत समाज के साथ ही साथ पूरा हिंदू समाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग करता है कि लव जिहाद को रोकने के लिए जल्द कठोर कानून बने और हिंदू बहन-बेटियों का जीवन बर्बाद होने से बचाया जा सके।

जनता के बीच फांसी लगा देना चाहिएः गिरी

गिरी ने कहा कि लव जिहाद में कुछ मुस्लिम युवक तिलक लगाकर, हाथ में कलावा पहनकर और रुद्राक्ष की माला पहनकर हिंदू बहन-बेटियों को अपने प्रेम के जाल में फंसाते हैं और फिर उनसे शादी कर जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव डालते हैं। इस वजह से हिंदू बहन-बेटियों का जीवन बर्बाद हो जाता है और उनमें से कई लोगों की हत्या भी कर दी जाती है या उन्हें छोड़ दिया जाता है। यह एक दंडनीय अपराध है।

महंत ने कहा कि लव‌ जिहादियों को बीच चौराहे पर जनता के बीच फांसी पर लटका देना चाहिए। लव जिहाद के पीछे संगठित गिरोह महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि लव जिहाद की बढ़ रही घटनाओं के पीछे कहीं न कहीं एक संगठित गिरोह काम कर रहा है। इसमें मुस्लिम धर्मगुरु और मौलाना भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि लव जिहादियों का संगठित गिरोह है और निश्चित तौर पर इन्हें फंडिंग भी की जाती है इसलिए लव जेहादियों पर रोक लगाने के लिए पहले इनकी फंडिंग को रोकना जरूरी है।

गिरी ने कहा कि षड्यंत्र के तहत हिंदू समाज को बदनाम करने की साजिश चल रही है। पिछले 15-20 सालों में सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, जिससे लव जिहादियों का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है।

बहन-बेटियों से अपील

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने हिंदू बहन बेटियों से भी अपील की है कि वे लव जिहादियों के झांसे में कतई न आएं। उन्होंने कहा कि लड़कियां अपने माता-पिता द्वारा चुने हुए जीवन साथी से ही विवाह करें। यदि उनका किसी से प्रेम है तो उसके बारे में भी पूरी जानकारी कर लें और परिवार से विचार-विमर्श के बाद ही शादी जैसा महत्वपूर्ण निर्णय लें।

-एजेंसियां

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