भीमा कोरेगांव हिंसा: NIA ने एक और आरोपपत्र दायर किया, दलित उग्रवाद को बढ़ाने की थी साजिश

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मुंबई। भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच कर रही NIA ने एक और आरोपपत्र कोर्ट में दायर किया है। इसमें कहा गया है कि फरार आरोपी मिलिंद तेलतुम्बडे सीपीआई (माओवादी) का एक वरिष्ठ सदस्य है। वह अपने भाई आनंद के साथ मिलकर शहरी क्षेत्रों में नक्सल आंदोलन के विस्तार की योजना पर काम करता था।

एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक और दावा किया है। एनआईए को एक गवाह ने बताया कि माओवादी नेतृत्व में एक बैठक का आयोजन किया गया था। इसमें कार्यकर्ता और शिक्षाविद आनंद तेलतुम्बडे ने क्रांतिकारी पुनरुत्थान के नाम पर दलित उग्रवाद को बढ़ाने के लिए बयान दिया था।

हाल ही में एनआईए ने विशेष अदालत में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। गवाह का यह बयान उस आरोप पत्र में शामिल किया गया है। आरोप पत्र में गवाहों की ओर से दिए गए छह बयान हैं। गवाहों की पहचान छिपाई गई है।

‘विदेशों से लाता था उग्रवाद को बढ़ावा देने वाला साहित्य’

एक अन्य गवाह ने दावा किया कि तेलतुम्बडे अकैडमिक यात्राओं की आड़ में फिलीपींस, पेरू और तुर्की जैसे देशों में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेते थे। यहां पर वह माओवादी साहित्य और वीडियो को डिजिटल रूप में लेकर भारत वापस आते थे। गवाहों ने एनआईए को उमर खालिद, नवलखा के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और क्लासेस के दौरान प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के सदस्यों को वीडियो और साहित्य दिखाए जाते थे।

1 जनवरी 2018 को भड़की थी हिंसा

आनंद तेलतुम्बडे को 14 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उनका नाम, उन आठ में से एक है जिनके खिलाफ एनआईए ने 9 अक्टूबर को एक पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है। यह मामला 1 जनवरी 2018 को पुणे के पास भीमा कोरेगांव में हुई जातिगत हिंसा से संबंधित है।

भाई के साथ मिलकर माओवाद के लिए काम करता था तेलतुम्बडे

गवाह ने यह भी दावा किया कि फरार आरोपी मिलिंद तेलतुम्बडे, सीपीआई (माओवादी) का एक वरिष्ठ सदस्य है। वह अपने भाई आनंद के साथ मिलकर शहरी क्षेत्रों में नक्सल आंदोलन के विस्तार की योजना पर काम करता था। आरोप पत्र में कहा गया है, ‘मिलिंद, जंगली और शहरी इलाकों में सीपीआई (माओवादी) के आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अपने भाई आनंद से मार्गदर्शन लेते थे। मिलिंद कहते थे कि उनके बड़े भाई-बहन ने उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था।’

भीमा कोरेगांव केस में ये आरोपी हैं गिरफ्तार

आरोप पत्र में कहा गया है कि ‘शहरी नक्सलियों’ में आरोपी अरुण फरेरा, सांस्कृतिक समूह कबीर कला मंच के सदस्य रमेश गाइचोर, सागर गोरखे और ज्योति जगताप, सुरेंद्र गडलिंग, वर्नोन गोंसाल्वेस, गौतम नवलखा, पी वरवारा राव, शोमा सेन, सुधा भारद्वाज, विल्सन, सुधीर धवले और महेश राउत गिरफ्तार हैं।

‘अर्बन पार्टी मेंबर था उमर खालिद’

एक तीसरे गवाह ने कहा कि उन्होंने, जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद (इस मामले में नाम नहीं) अर्बन पार्टी मेंबर होने और दिल्ली में अन्य सदस्यों के साथ अपने अजेंडे को बढ़ावा देने के लिए काम करने के बारे में सुना था। गवाह ने कहा कि खालिद उन लोगों में से था, जिन्होंने 31 दिसंबर, 2017 को एल्गर परिषद में भाषण दिया था।

वरवर राव का अच्छा दोस्त है नवलखा

एक अन्य गवाह ने कार्यकर्ता नवलखा को माओवादी सहानुभूति देने वाला बताया। गवाह ने बताया कि गौतम नवलखा ने माओवादियों पर किताबें लिखी हैं, उन्होंने स्वीडिश लेखक (बयान में नाम नहीं) के साथ जंगलों का दौरा किया है और माओवादी नेताओं से मुलाकात की है। नवलखा ने जी एन साईंबाबा रक्षा समिति की रिलीज में हिस्सा लिया था। नवलखा हमेशा वामपंथी राजनीति पर बोलते हैं। नवलखा की वरवर राव की अच्छी दोस्त हैं। नवलखा नागरिक अधिकार ग्रुपों में शामिल थे।

स्टेन स्वामी को इसलिए दी गई थी जिम्मेदारी

हाल ही में गिरफ्तार किए गए जेसुइट पुजारी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता स्टेन स्वामी का हवाला देते हुए, एक गवाह ने एनआईए को बताया कि चूंकि पार्टी के सदस्यों को देश के कई हिस्सों से गिरफ्तार किया गया था और पार्टी के पास चेहरा नहीं बचा था, इसलिए 83 वर्षीय को जिम्मेदारी दी गई थी। जैसा कि वह सरकार के खिलाफ था। आरोप पत्र में कहा गया है कि स्टेन स्वामी की अपनी पहचान है। झारखंड में उनका अपना एनजीओ है।

-एजेंसियां

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