जितेंद्र सिंह का एक गाना ”फूंक—फूंक के पीना रे…” बटोर रहा है काफी तारीफें

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मुंबई : उनकी आवाज़ कानों में मिश्री के जैसे घुलती है. उनके अलाप सीधे दिल में उतर जाते हैं। उनको लाइव सुनो तो ऐसा लगता है जैसे कोई फकीर अपनी धुन में सुरों के तार छेड़ रहा हो। ये हैं पंजाब के जतिंदर सिंह, जो आजकल बॉलीवुड को अपनी आवाज़ से अपना मुरीद बना रहे हैं। अभी हाल ही में उनका एक गाना ”फूंक—फूंक के पीना रे…”काफी तारीफें बटोर रहा है। इस गाने ने रिमिक्स गानों से उकताए हुए श्रोताओं को आजादी दी है।

इस गाने के बारे में जंतिंदर ने कहा कि यह गाना मेरे दिल के बेहद करीब है। जब मैं मुंबई आया था, तब भी इस गाने के म्यूजिक कम्पोज़र गौरव चटर्जी ने मुझे इस गाने को गाने के लिए बुलाया था। मुझे इस गाने के लिरिक्स बहुत पसंद आए थे, जो संदीप गौड़ ने लिखे हैं। मुझे हमेशा लगता था कि कभी जब ये गाना किसी फिल्म में आएगा तो अपनी अलग पहचान बनाएगाऔर आज ये बात सच साबित हुई है। जतिंदर कहते हैं कि बॉलीवुड में अच्छे गाने मिलना भी काफी चैलेंजिंग है।

जतिंदर ने बताया कि उन्होंने भी यहां तक आने के लिए काफी संघर्ष किया है। पिता कुलबीर सिंह जो कि इंडियन ओवरसीज बैंक में सर्विस करते हैं। वो घर पर ही हार्मोनियम पर गजलें, गीत और क्लासिकल गाया करते थे, जिसमें जतिंदर उनके साथ सुर में सुर मिलाया करते थे। संगीत के इस सफर में जतिंदर की फेमिली और ख़ासतौर पर पिताजी जो कि उसके गुरू भी हैं ने बहुत सहयोग दिया। इसके अलावा जतिंदर के मामाजी कृपाल सिंह और सुखदेव सिंह, जिन्होंने इनको जिंदगी का पहला वॉकमैन उपहार में दिया था, ने हमेशा बहुत सपोर्ट किया है। जतिंदर ने बहुत छोटी उम्र में ही स्टेज परफोरमेंस शुरू कर दी थी। 2008 से उन्होंने विदेशों में परफोर्म करना शुरू किया इसके चलते उन्होंने सउदी अरब, मस्कट, बहरीन, सिंगापुर, मलेशिया, बैंकाक, यूरोप और एशिया के अलावा और भी कई देशों में जाकर अपनी गायकी के जौहर दिखाए।

जतिंदर ने अपने पिता कुलबीर सिंह की सलाह पर 2014 में मुंबई में बॉलीवुड में अपना ध्यान केंद्रित किया और पहले ही हफ्ते में फिल्म जिगरिया का गाना रंग रंग दे गाने का मौका मिला। 2015 में फिल्म टेक इट इज़ी में ‘नन्हें से’, फिल्म 2016 दि एंड में गाना ‘पगली’, 2018 में फिल्म अंग्रेजी में कहते हैं में कव्वाली ‘आज रंग है’ टाइगर श्राफ की फिल्म बागी 2 का टाइटल सांग गेट रेडी टू फाइट, अभिषेक बच्चन की फिल्म मनमर्जियां में ‘जला दी’ जैसे गाने गाए हैं।

जतिंदर ने क्षेत्रीय भाषाओं में भी कई गीत गाए हैं। अपने पिता से क्लासिक की तालीम के बाद जतिंदर ने दूसरे घरानों की तालीम लेने के लिए और भी उस्तादों से सीखा जिनमें मुंबई से मिसेज गीता प्रेम, जालंधर से प्रोफेसर बी.एस. नारंग, अमृतसर से उस्ताद विश्वजीत राणा और मास्टर ज्ञान जी शामिल हैं। जतिंदर के अनुसार कई शख्सियतों ने उसको प्रभावित किया हैे जिनमें उनके पिता कुलबीर सिंह के गाने का अंदाज़, उस्ताद नुसरत फतेह अली खान, पंडित भीमसेन जोशी और एआर रहमान विशेष तौर पर शामिल हैं।

-अनिल बेदाग़-

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