कट्टरपंथियों के निशाने पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों

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पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने वाले फ़्रांस के एक शिक्षक की हत्या के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बयानों ने कई मुस्लिम देशों को नाराज़ कर दिया है.
मैक्रों ने अपने बयान में कट्टरपंथी इस्लाम की आलोचना की थी और शिक्षक की हत्या को ‘इस्लामिक आतंकवादी हमला’ कहा था.

कई अरब देशों ने फ़्रांस के सामानों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है. कुवैत, जॉर्डन और क़तर की कुछ दुकानों से फ़्रांस के सामान हटा दिए गए हैं. वहीं लीबिया, सीरिया और ग़ज़ा पट्टी में फ़्रांस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए हैं.

फ़्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ‘बहिष्कार की बेबुनियाद’ बातें अल्पसंख्यक समुदाय का सिर्फ़ एक कट्टर तबका ही कर रहा है.

ये विरोध पैगंबर मोहम्मद का विवादित कार्टून कक्षा में दिखाने वाले एक शिक्षक की हत्या के बाद मैक्रों की टिप्पणियों को लेकर है.

मैक्रों पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून को दिखाने का ये कहते हुए बचाव कर रहे हैं कि एक ख़ास समुदाय की भावनाओं की वजह से अभिव्यक्ति की आज़ादी को ताक पर नहीं रखा जा सकता.
उनका कहना है कि ये धर्मनिरपेक्ष फ़्रांस की एकता को कम करता है.

राष्ट्रपति मैक्रों ने इस महीने की शुरुआत में शिक्षक की हत्या से पहले ही फ्रांस में “इस्लामिक अलगाववाद” से निपटने के लिए कड़े क़ानून बनाने की घोषणा की थी.
उस समय उन्होंने कहा था, “डर है कि फ़्रांस की क़रीब 60 लाख मुस्लिमों की आबादी समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग पड़ सकती है.” साथ ही उन्होंने इस्लाम को एक ऐसा धर्म बताया था, जो ‘संकट में’ है.

मैक्रों के बयानों की काफ़ी आलोचना हुई है. तुर्की और पाकिस्तान ने मैक्रों पर आरोप लगाया है कि वो ‘आस्था की स्वतंत्रता’ का सम्मान नहीं कर रहे हैं और फ़्रांस के लाखों मुसलमानों को हाशिए पर धकेल रहे हैं.

रविवार को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने मैक्रों को इस्लाम के बारे में उनकी सोच की वजह से “दिमागी इलाज” कराने का सुझाव दिया.
अर्दोआन की इस टिप्पणी के बाद फ़्रांस ने तुर्की स्थित अपने राजदूत को सलाह के लिए बुलाया था.
फ़्रांस के सामान का बहिष्कार कितना बड़ा है?

रविवार को जॉर्डन, क़तर और कुवैत के कुछ सुपरमार्केट में फ़्रांस के सामान हटा दिए गए. मिसाल के तौर पर फ़्रांस में बने हेयर और ब्यूटी प्रोडक्ट दुकानों में नहीं दिखे.
कुवैत में एक बड़े रिटेल यूनियन ने फ़्रांस के सामानों के बहिष्कार का आदेश दिया था.

उपभोक्ता सहकारी समितियों के ग़ैर-सरकारी संघ ने कहा कि उसने पैगंबर मोहम्मद के ‘बार-बार हुए अपमान’ के जवाब में ये निर्देश जारी किए हैं.
एक बयान में फ़्रांस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ‘बहिष्कार की बेबुनियाद’ बातें अल्पसंख्यक समुदाय का एक अतिवादी तबका ही कर रहा है और बहिष्कार को तुरंत रोका जाना चाहिए.

सऊदी अरब में भी सोशल मीडिया के ज़रिए बहिष्कार का ऐसा ही आह्वान किया जा रहा है.
अरब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, सऊदी अरब में फ़्रांस के सुपरमार्केट चेन कैरेफोर के बहिष्कार की मांग वाला हैशटैग दूसरे नंबर पर ट्रेंड कर रहा था.
इस बीच लीबिया, ग़ज़ा और उत्तरी सीरिया में भी फ़्रांस विरोधी छोटे प्रदर्शन हुए. इन इलाक़ों में तुर्की समर्थित मिलिशिया का नियंत्रण है.

पाकिस्तान ने क्या कहा?

तुर्की के राष्ट्रपति ने एक भाषण में सवाल किया था: “मैक्रों नाम के व्यक्ति को इस्लाम और मुस्लिमों से क्या समस्या है?”
वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने फ़्रांस के नेता पर आरोप लगाया कि “वो इस्लाम की किसी स्पष्ट समझ के बिना ही इस्लाम पर हमला कर रहे हैं.”
उन्होंने एक ट्वीट में कहा, “राष्ट्रपति मैक्रों ने यूरोप और दुनिया भर के लाखों मुसलमानों की भावनाओं पर हमला किया है और उन्हें चोट पहुँचाई है.”

इमरान ख़ान ने रविवार को फ़ेसबुक के प्रमुख मार्क ज़करबर्ग को पत्र लिखकर अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से इस्लाम विरोधी सामग्री हटाने और इस तरह की सामग्री की पोस्टिंग पर प्रतिबंध लगाने की अपील की.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक़, इमरान ख़ान ने ज़करबर्ग से कहा है, “वो फ़ेसबुक पर बढ़ते इस्लामोफ़ोबिया की ओर उनका ध्यान आकर्षित कराना चाहते हैं, जो वैश्विक स्तर पर नफ़रत, अतिवाद और हिंसा फैला रहा है.”

इमरान का ये पत्र उसी दिन सामने आया, जब उन्होंने फ़्रांस के राष्ट्रपति पर “इस्लाम पर हमला” करने का आरोप लगाया.

रविवार को इमरान ख़ान ने कई ट्वीट कर कहा कि मैक्रों के बयान विभाजन पैदा करेंगे.
इमरान ने लिखा, “ये ऐसा वक़्त है, जब राष्ट्रपति मैक्रों को संवेदनशीलता के ऐसे मुद्दों को सुलझाना चाहिए था और अतिवादियों को अस्वीकार करना चाहिए था, बजाए इसके कि वो ध्रुवीकरण और हाशिए पर धकेलने का काम करें, जिससे कट्टरता और बढ़ेगी.”

साथ ही उन्होंने कहा, “ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने हिंसा करने वाले आतंकवादियों, चाहे वो मुस्लिम हों, गोरे हों या नाज़ी विचारधारा के हों, उनकी आलोचना करने की बजाए, इस्लाम पर हमला कर इस्लामोफ़ोबिया को बढ़ावा देना चुना.”

वहीं फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने एक ट्वीट कर कहा है कि ‘हम कभी हार नहीं मानेंगे.’
उन्होंने लिखा, “हम शांति की भावना रखने वाली सभी असहमतियों का सम्मान करते हैं. हम नफ़रत वाले भाषणों को स्वीकार नहीं करते और उचित बहस का बचाव करते हैं. हम हमेशा मानवीय गरिमा और मूल्यों के लिए खड़े रहेंगे.”

मैक्रों के इस ट्वीट को नुक़सान की भरपाई की उनकी कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. उन्होंने यही ट्वीट अंग्रेज़ी के साथ-साथ अरबी भाषा में भी किया है.

इससे पहले उन्होंने फ़्रेंच में भी कई ट्वीट किए थे, जिनमें से एक में उन्होंने लिखा है, “हमारा इतिहास अत्याचार और कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ संघर्ष का है. हम जारी रखेंगे.”

-BBC

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