आगरा: सत्यमेव जयते ने की इकोफ्रेंडली गौरी-गणेश की मूर्तियां बनाने की पहल, कंपोस्ट खाद में होगी तब्दील

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आगरा। भारतीय परंपरा में बेहद पवित्र और अपने औषधीय महत्व के कारण पंचगव्य में से एक गाय के गोबर से गौरी-गणेश की मूर्तियां बनाने की पहल शुरू की गई है। सत्यमेव जयते ट्रस्ट द्वारा शुरू की गई इस पहल में इस बार दीपावली में लोग इन मूर्तियों का भी पूजन में उपयोग कर सकते हैं। बायोडिग्रेडबल होने के कारण ये मूर्तियां इको फ्रेंडली होंगी। घर के गमले में विसर्जित करने पर ये कंपोस्ट खाद में तब्दील हो जाएंगी। यह पर्यावरण संरक्षण का एक संदेश भी देंगे।

सत्यमेव जयते ट्रस्ट के हरीश कुमार वासवानी ने बताया कि ट्रस्ट की तरफ से एक अनोखी पहल की शुरुआत की गई है जिसमें ट्रस्ट की तरफ से गोबर से गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां बनाने और उनकी धार्मिक मान्यताओं से लोगों को रूबरू कराने का काम किया जा रहा है। गाय का गोबर भारतीय परंपरा में बेहद पवित्र माना जाता है। सत्यमेव जयते ट्रस्ट द्वारा गाय के गोबर से तैयार की गयी मूर्तियों को लोग काफी पसंद कर रहे हैं और इस दिवाली पूजन में उपयोग भी करेंगे। बायोडिग्रेडबल होने के कारण ये मूर्तियां इको फ्रेंडली होंगी। घर के गमले में विसर्जित करने पर ये कंपोस्ट खाद में तब्दील हो जाएंगी. यह पर्यावरण संरक्षण का एक संदेश भी देंगी।

रविंद्र कुमार अग्रवाल ने बताया कि गोबर की बनी इको फ्रेंडली प्रतिमाओं का दाम भी सामान्य प्रतिमाओं के मुकाबले कम होगा, जबकि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के लिए ये फायदेमंद होगा। ऐसे में दीवाली पर्व पर ऐसी प्रतिमाओं का पूजन कर आप आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे सकते हैं।

अभी तक प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां पूजा के बाद लोग नदियों में फेक देते हैं, जिससे प्रदूषण भी होता है, लेकिन गोबर की बनी मूर्तियां पूरी तरह से ईकोफ्रेंडली होती हैं। इन्हें बनाने में ऐसा कुछ भी नहीं डाला जाता, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचे।

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