मथुरा: विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के अवसर पर जागरूकता रैली एवं गोष्ठी का किया गया आयोजन

Updated 15 Oct 2019

मथुरा। विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के अवसर पर जागरूकता रैली एवं गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस रैली को डॉ आर एस मौर्य और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ दिलीप कुमार द्वारा संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रैली जिला चिकित्सालय से प्रारंभ होकर मुख्य मार्गों से होते हुए तक ब्रज चिकित्सा संस्थान तक निकाली गयी।

ब्रज चिकित्सा संस्थान में इस अवसर पर एक गोष्ठी का भी आयोजन हुआ जिसमें अध्यक्षता कर रहे कार्यक्रम के नोडल डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सेल की स्थापना जिला अस्पताल में की गई है, जहां पर सप्ताह में 6 दिन ओपीडी होती है। मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में वहां पर कोई भी निशुल्क परामर्श ले सकते हैं तथा औषधियां भी निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन कर रहे जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि मानसिक रोग किसी को भी हो सकता है। छात्र-छात्राओं में बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति या एक चिंतन का विषय है जिसके रोकथाम के लिए शासन द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं एवं जागरूकता के लिए रैली गोष्ठी आयोजित की गई है।

साइकेट्रिस्ट गौरव कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य के बारे में विस्तृत जानकारी दी और बताया कि बार-बार बुरा होने का विचार, झुनझुनाहट एवं अत्यधिक चिंता या तनाव महसूस होना जल्दी थकान का आना, हाथों में कंपन होना और अंधेरे में भय लगन, अजनबियों से भय लगना सभी मानसिक रोग के लक्षण है।

चिकित्सकों का कहना है कि मानसिक रोग, मस्तिष्क की उस व्यवस्था या अति व्यवस्था की स्थिति है जिसमें व्यक्ति के सोच, अनुभव, ज्ञान, चेतना एवं समाज के सामान्य नियमों के अनुरूप व्यवहार करके की योग्यता में कमी आ जाती है या छिन्न भिन्न हो जाती है। आज भारत में लगभग दो करोड़ व्यक्ति गंभीर मानसिक बीमारियों से ग्रसित हैं। इसके अतिरिक्त 5 से 10 करोड़ लोग साधारण मानसिक समस्याओं बसे ग्रसित हैं।

मानसिक रोग या पागलपन एक ऐसा शब्द है जिसके कारणों एवं उपचार के विषय में न जाने कितनी भ्रांतियाँ एवं आशंकाएँ जुड़ी हैं। कुछ लोग इसे एक असाध्य, आनुवंशिक एवं छूत की बीमारी मानते हैं, तो कुछ जादू- टोना, भूत-प्रेत व डायन का प्रकोप। दूसरी तरफ कुछ लोग इसे बीमारी न मानकर जिम्मेदारियों से बचने का नाटक मात्रा भो मानते हैं। उपचार के लिए स्थानीय या नजदीकी ओझा, पंडित, मुल्ला आदि के पास जाकर अनावश्यक भभूत, जड़ी- बूटी का सेवन करतें हैं तथा अमानवीय ढंग से सताये जाते हैं ताकि पिशाच आत्मा का प्रकोप दूर किया जा सके। सही बात यह है कि है कि यह एक बीमारी है और वैज्ञानिक ढंग से चिकित्सा विज्ञान द्वारा इसका इलाज संभव है।

साइकेट्रिक सोशल वर्कर अभिषेक पांडे ने बताया कि मानसिक रोग के कारण क्या हैं-

मस्तिष्क में जैविक एवं रासायनिक गड़बड़ी का होना, मस्तिष्क के विभिन्न रोग (मस्तिष्क ज्वर, अशुद्ध रक्त पूर्ति, कैंसर, मिर्गी आदि), सड़क दुर्घटनाओं से मस्तिष्क आघात आदि इसके अलावा विषैले नशीले द्रव्यों के सेवन, मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए आवश्यक प्रोटीन, विटामिन तथा अन्य तत्वों की कमी। मानसिक रोग होने के मनोवैज्ञानिक एवं परिवेषजनित कारकों का भी कम महत्व नहीं है। इनमें मुख्यतया सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारण जैसे – व्यक्ति के संबंधों में अनेक कारणों से तनाव उत्पन्न हो जाना, आर्थिक परेशानी, वैवाहिक जीवन की समस्या, प्रियजनों से विद्रोह, कलुषित पारिवारिक वातावरण , बार- बार कुंठाओं से ग्रसित होता, स्नेह व प्यार की कमी, बेरोजगारी, तीव्र सामाजिक परिवर्तन आदि अनेक मनोसामाजिक समस्याएं हैं।

रैली एवं गोष्ठी में ब्रज चिकित्सा संस्थान के वाइस प्रिसिपल डॉ मनीष कुमार, भारत भूषण , अर्बन हेल्थ कॉडीनेटर फोजीया खानम विवेक वर्मा मुकेश राजपूत आदि उपस्थित थे।




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