पॉक्सो कानून में बदलाव को मंजूरी, मृत्युदंड का प्रावधान शामिल

Updated 10 Jul 2019

नई दिल्‍ली। केंद्रीय कैबिनेट ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण विधेयक पॉक्सो 2012 के संशोधन में जेंडर न्यूट्रल और सख्त सजा के प्रावधानों को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा जुर्माना चाइल्ड पोर्नोग्राफी के मामलों में भी सख्त कार्रवाई के साथ सजा के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। पॉक्सो विधेयक को इस साल के शुरू में दोनों सदनों में पेश किया गया था लेकिन इन्हें पारित नहीं किया गया था।
 
विधेयक में विकल्प प्रदान करने के लिए अधिनियम की धारा 4,5,6 और 9 में संशोधन की मांग की गई थी। इस पर कैबिनेट ने बुधवार को मासूमों से दुष्कर्म और प्रयास को कड़ी सजा और मृत्युदंड की परिधि में लाया गया है। इससे बच्चों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न पर सजा के वर्तमान प्रावधानों को कठोर कर दिया गया है।
 
अब इस प्रस्ताव के पास होने के बाद 18 साल से कम उम्र के बच्चे वह चाहे किसी भी लिंग के हो यदि उनके विरुद्ध अपराध होता है तो मृत्युदंड का प्रावधान है। साथ ही अन्य मामलों में भी कड़ी सजा की सिफारिश की गई है। ताकि समाज के समाने कानून का डर बने और बच्चों के प्रति अपराधों में कमी आए। अब इस बिल को इन संशोधनों के साथ दोनों सदनों के पटल पर लाया जाएगा। ताकि इसे पास कराके कड़े कानूनों के तुरंत प्रभाव से लागू कराया जा सके।
 
बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों की घटनाएं समाज को शर्मसार करती हैं। इस तरह के मामलों की बढ़ती संख्या देखकर सरकार ने वर्ष 2012 में एक विशेष कानून बनाया था। पॉक्सो कानून यानी की Protection of Children from Sexual Offences Act 2012 जिसको हिंदी में लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012 कहा जाता है।
 
इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध में अलग-अलग सजा का प्रावधान है और यह भी ध्यान दिया जाता है कि इसका पालन कड़ाई से किया जा रहा है या नहीं। इस कानून की धारा चारा में वो मामले आते हैं जिसमें बच्चे के साथ कुकर्म या फिर दुष्कर्म किया गया हो। इस अधिनियम में सात साल की सजा से लेकर उम्रकैद तक का प्रावधान है साथ ही साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
 
इस अधिनियम की धारा छह के अंतर्गत वो मामले आते हैं जिनमें बच्चों के साथ कुकर्म, दुष्कर्म के बाद उनको चोट पहुंचाई गई हो। इस धारा के तहत 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अगर धारा सात और आठ की बात की जाए तो उसमें ऐसे मामले आते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग में चोट पहुंचाई जाती है। इसमें दोषियों को पांच से सात साल की सजा के साथ जुर्माना का भी प्रावधान है।
 
18 साल से कम किसी भी मासूम के साथ अगर दुराचार होता है तो वह पॉक्सो एक्ट के तहत आता है। इस कानून के लगने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त अधिनियम की धारा 11 के साथ यौन शोषण को भी परिभाषित किया जाता है। जिसका मतलब है कि यदि कोई भी व्यक्ति अगर किसी बच्चे को गलत नीयत से छूता है या फिर उसके साथ गलत हरकतें करने का प्रयास करता है या उसे पॉर्नोग्राफी दिखाता है तो उसे धारा 11 के तहत दोषी माना जाएगा। इस धारा के लगने पर दोषी को तीन साल तक की सजा हो सकती है।
 
-एजेंसी



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