कोरोना के कारण अर्थव्यवस्था को करीब 120 अरब डॉलर का नुकसान

Updated 25 Mar 2020

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस की वजह से देशभर में लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था को करीब 120 अरब डॉलर की कीमत चुकानी होगी।
यही नहीं, इस वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर भी घट जाएगी। यह हिसाब बार्कलेज बैंक ने अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में लगाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंगलवार शाम को दिए गए राष्ट्र के नाम संदेश के बाद तैयार इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बदली परिस्थितियों के मद्देनजर कैलेंडर वर्ष 2020 के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर महज 2.5 फीसदी रह जाएगी जबकि पहले का अनुमान 4.5 फीसदी का था। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2020—21 के लिए विकास दर के पूर्वानुमान को 5.2 फीसदी से घटा कर 3.5 फीसदी कर दिया है।
अलगे वर्ष बढ़ेगी तेजी
चालू साल में भले ही विकास दर घटे लेकिन अगले साल इसमें बढ़ोत्तरी का अनुमान लगाया गया है। बार्कलेज ने कैलेंडर वर्ष 2021 के लिए सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी में 8.2 फीसदी की बढोत्तरी का अनुमान लगाया है जबकि वित्त वर्ष 2021—22 के लिए 8.0 फीसदी का।
लॉकडाउन से घाटा
रिपोर्ट का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था को करीब 120 अबर डॉलर का नुकसान होगा, जो कि जीडीपी का चार फीसदी है। इनमें से 90 अरब डॉलर का नुकसान को लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की वजह से होगा। जाहिर है कि इसका असर जीडीपी की विकास दर पर भी पड़ेगा।
बार्कलेज ने कहा कि केंद्र सरकार की तीन सप्ताह की बंदी से ही 90 अरब डॉलर का नुकसान होगा। इसके अलावा महाराष्ट्र जैसे कई राज्य पहले ही बंदी कर चुके हैं, उससे भी नुकसान होगा। बार्कलेज ने यह भी कहा कि अप्रैल में रिजर्व बैंक रीपो रेट में 0.65 प्रतिशत की कटौती करेगा तथा अगले एक साल में इसमें एक और प्रतिशत की कटौती की जाएगी। रिसर्च ऐंड अडवाइजरी कंपनी एमके ने अन्य देशों की तुलना में शीघ्रता से कदम उठाने को लेकर सरकार को बधाई देते हुए कहा कि इससे होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए उपाय नहीं किए गए हैं। उसने कहा, ‘सरकार बंदी के आर्थिक असर को लेकर अभी तक चुप ही रही है, असर को कम करने के उपायों को तो छोड़ ही दीजिए।’ कंपनी ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी की दोहरी मार झेलने वाले असंगठित क्षेत्र पर इसका सर्वाधिक असर होगा।
इससे पहले इन्होंने भी घटाया अनुमान
कुछ दिन पहले ब्रोकरेज कंपनी यूबीएस इंडिया ने 2020-21 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमान को घटा कर चार फीसदी कर दिया था जबकि पहले इसके 5.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। इसके अलावा, फिच मौजूदा वित्त वर्ष के लिए GDP अनुमान को 5.6 से घचाकर 5.1 पर्सेंट कर चुकी है। मूडीज ने इसे 5.4 से घटाकर 5.3 पर्सेंट कर दिया था और एस ऐंड पी ग्लोबल ने इसे पहले दए 5.7 पर्सेंट के अनुमान से घटाकर 5.2 पर्सेंट कर दिया था।
-एजेंसियां



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