मारुति के चेयरमैन ने बताया, कारों की बिक्री क्‍यों हुई कम ?

Updated 11 Sep 2019

नई दिल्‍ली। देश के बैंकिंग सिस्टम की ‘कमजोर निर्णय शक्ति’ और कारों में एयरबैग्स और एबीएस जैसे सेफ्टी फीचर्स जोड़ने की शुरुआत के कारण कारें महंगी होती चली गईं और दुपहिया वाहन चलाने वालों की पहुंच से बाहर होती चली गईं। यह कहना है देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव का। उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए एंट्री लेवल कारें खरीदना महंगा हो गया है।
ऐसे समय जब देश में वाहनों की बिक्री ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई है, भार्गव ने पेट्रोल और डीजल पर ऊंची टैक्स दर और राज्य सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि राज्य सरकारों द्वारा रोड एंड रजिस्ट्रेशन चार्जेस बढ़ाए जाने की वजह से भी कार खरीदार खरीदारी से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा कि GST में कटौती से भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला क्‍योंकि यह अस्थाई होगा। GST में कटौती को टाला भी जा सकता है। GST कटौती को लेकर भार्गव के विचार ऑटो इंडस्ट्री बॉडी SIAM और अन्य कंपनियों के सीईओ से मेल नहीं खाते। इंडस्ट्री लगातार सुस्ती से निपटने को GST कट की मांग कर रही है, लेकिन भार्गव का कहना है कि इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला।
एक इंटरव्यू में भार्गव ने ऑटो सेल्स में 50% की गिरावट का हवाला देते हुए कहा, ‘एक शख्स जो बाइक चलाता है, वह कार चलाना चाहता है लेकिन वह पैसों की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाता।’
भार्गव ने ऑटो सेक्टर की मौजूदा सुस्ती (जहां बिक्री 2 दशकों के निम्नतम स्तर पर पहुंच गई है) के पीछे इस तर्क को मानने से इंकार कर दिया है कि इसका स्ट्रक्चरल शिफ्ट से कोई लेना-देना है। उनका कहना है कि ओला-ऊबर जैसी ऐप बेस्ड सुविधाओं का बढ़ता इस्तेमाल, इसके पीछे वजह नहीं बल्कि अन्य फैक्टर स्लोडाउन का कारण हैं।
उन्होंने कहा, सख्त सेफ्टी व एमिशन के नियम, बीमा की ज्यादा लागत और करीब 9 राज्यों मेंअतिरिक्त रोड टैक्स जैसी वजहों से ऑटो सेक्टर में कन्ज्यूमर सेंटिमेंट बिगड़ा है।
इन सभी फैक्टर्स की वजह से एंट्री लेवल कारों की कीमत करीब 55,000 रुपये तक बढ़ गई है। इस बढ़ी कीमत में 20,000 रुपये का इजाफा सिर्फ रोड टैक्स की वजह से हुआ है। बैंक भी गाड़ियां फाइनैंस करने को लेकर डरते हैं और रिस्क नहीं लेना चाहते, जो एक बड़ा मुद्दा है।
भार्गव ने कहा कि अतिरिक्त सुरक्षा मानक विकसित देशों के लिए हैं, भारत जैसे देश के लिए इनका कोई प्रैक्टिकल लॉजिक नहीं है। उन्होंने कहा, ‘भारत में कार खरीदने वाले यूरोप या जापान से नहीं हैं। यहां प्रति व्यक्ति आय 2,200डॉलर के आसपास है, चीन में 10,000 डॉलर के आसपास और यूरोप में करीब 40,000 डॉलर। ऐसे में यूरोप की आम जनता से यहां के लोगों की कैसी तुलना बेमानी है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘जब नियमों की बात आती है तो सब कहते हैं कि हमारे नियम सबसे अच्छे होने चाहिए… लेकिन आपको यहां के लोगों की आय को देखते हुए किसी प्रोडक्ट की अफोर्डेबिलिटी भी देखनी चाहिए।’
पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री में 2 दशकों की सबसे बड़ी गिरावट
बता दें कि इंडियन ऑटोमोबाइल मार्केट में दबदबा रखने वाली एंट्री लेवल कारों की बिक्री इस वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में 28 पर्सेंट घटी है। इस सेगमेंट में आई गिरावट ओवरऑल मार्केट में कुल गिरावट से ज्यादा है। गाड़ियों की कीमत डबल डिजिट्स में बढ़ने, ग्रामीण बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ने और आर्थिक सुस्ती के कारण एंट्री कारों के संभावित खरीदार नई गाड़ी खरीदने से बच रहे हैं।
-एजेंसियां



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