कई आइटम्स से हटाया जा सकता है 28 प्रतिशत का GST स्लैब

Updated 10 Jun 2019

डिमांड में नरमी से निपटने की कोशिशों के तहत गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स GST के स्ट्रक्चर में बदलाव कर इसके सबसे ऊंचे 28 प्रतिशत के स्लैब से कई आइटम्स को हटाया जा सकता है। कुछ राज्यों ने टैक्स रेट घटाने का समर्थन किया है। उनकी चिंता यह है कि सुस्ती का दायरा बढ़ सकता है। उन्होंने अपनी राय केंद्र सरकार को बता दी है।
5 जुलाई को पेश किए जाने वाले आम बजट से पहले GST काउंसिल की 20 जून को बैठक हो सकती है। उस बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। नई मोदी सरकार में वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहीं निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में काउंसिल की पहली बैठक होगी।
GST काउंसिल इस बैठक में इलेक्ट्रिॉनिक इनवॉयसिंग शुरू करने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है। काउंसिल एंटी-प्रॉफिटियरिंग फ्रेमवर्क का विस्तार करने पर चर्चा कर सकती है। इस फ्रेमवर्क का दायरा नोटिफिकेशन के जरिए बढ़ाया जा सकता है।
टैक्स रेट में कमी करने का दबाव डाल सकने वाले एक राज्य के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, ‘डिमांड में सुस्ती साफ दिख रही है। इस मोर्चे पर जल्द कदम उठाने होंगे।’ उन्होंने कहा, ‘इस सुस्ती का दायरा बढ़ सकता है। नौकरियों पर आंच आ रही है।’
ऑटोमोबाइल्स को 28 प्रतिशत GST वाले ब्रैकेट में रखा गया है। गाड़ियों पर उनके आकार और सेगमेंट के मुताबिक कंपनसेशन सेस भी लगता है। रेट घटाने से कीमत कम होगी और इससे हो सकता है कि कंज्यूमर्स मुट्ठी ढीली करें। इस संबंध में आखिरी निर्णय राजस्व की स्थिति देखकर होगा। एक सरकारी अधिकारी ने हालांकि कहा कि इकनॉमी की हालत को ज्यादा अहमियत दी जाएगी क्योंकि सुस्ती देर तक बने रहने से भी राजस्व पर ही असर पड़ना है।
आरबीआई ने पिछले दिनों रेट कट किया था। यह इस साल लगातार तीसरा रेट कट था। इससे रेपो रेट नौ साल के निचले स्तर पर आ गया है। ग्रोथ के मोर्चे पर दिख रही चिंता के कारण आरबीआई ने अपना रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘एकोमोडेटिव’ भी कर लिया है। इस तरह उसने संकेत दिया है कि आने वाले समय में और रेट कट हो सकता है।
इंडियन इकनॉमी की ग्रोथ रेट वित्त वर्ष 2019 में 6.8 प्रतिशत के साथ पांच साल के निचले स्तर पर रही। जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान यह 5.8 प्रतिशत थी। यह इसकी 20 तिमाहियों में सबसे धीमी रफ्तार थी।
इडलवाइज की एनालिसिस के अनुसार अधिकतर कंज्यूमर गुड्स कंपनियों ने मार्च क्वॉर्टर के मुनाफे में कमी दर्ज की थी। ऐसा मुख्य तौर पर रूरल एरिया में सुस्ती और कमजोर कंज्यूमर सेंटीमेंट के कारण हुआ। पैसेंजर वीकल सेल्स अप्रैल में 17% घटी थी और मई भी अधिकतर कंपनियों के लिए इतना ही बुरा साबित हुआ। मई में मारुति की सेल्स सालभर पहले से 22 प्रतिशत कम रही।
एक्सपर्ट्स ने ऑटो सेक्टर में एक्युमुलेटेड क्रेडिट की ओर भी इशारा किया। पीडब्ल्यूसी के नेशनल लीडर (इनडायरेक्ट टैक्स) प्रतीक जैन ने कहा, ‘कई डीलरों को एक्युमुलेटेड इनपुट क्रेडिट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा पोस्ट-सेल डिस्काउंट्स और इनवेंटरी धीरे-धीरे घटने के कारण हुआ है।’ जैन ने कहा कि डिमांड बढ़ाने के लिए GST रेट घटाना चाहिए, खासतौर से छोटी और एनवायरमेंट फ्रेंडली कारों के मामले में।
-एजेंसियां



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